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Breaking News : "बस स्टैंड पर विज्ञापन का खेल पड़ा महंगा!, ग्रेटर नोएडा में फेलिक्स हॉस्पिटल को 10 लाख का नोटिस, अब अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टरों पर चलेगा प्राधिकरण का बड़ा बुलडोजर अभियान", पूरे शहर में अवैध होर्डिंग हटाने की उठी मांग

*बस स्टैंड पर अवैध होर्डिंग लगाने पर फेलिक्स हॉस्पिटल को 10 लाख का नोटिस,GNIDA के वरिष्ठ प्रबंधक सनी यादव जी की सख्त कार्रवाई; अब पूरे शहर में चलेगा अवैध प्रचार के खिलाफ अभियान, 30 जून की कार्रवाई की

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित शहर बनाने की दिशा में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने अवैध प्रचार सामग्री के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। सार्वजनिक संपत्तियों पर बिना अनुमति विज्ञापन लगाने वालों को स्पष्ट संदेश देते हुए प्राधिकरण ने सेक्टर स्थित एक बस स्टैंड पर बिना स्वीकृति होर्डिंग लगाने के मामले में फेलिक्स हॉस्पिटल को 10 लाख रुपये का नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई 30 जून को की गई थी, जिसे अब शहर में अवैध प्रचार के खिलाफ एक मिसाल माना जा रहा है।
प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक सनी यादव के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई को लेकर शहर में व्यापक चर्चा है। माना जा रहा है कि अब केवल एक संस्था ही नहीं, बल्कि उन सभी अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों, पीजी संचालकों, प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई होगी, जिन्होंने सरकारी संपत्तियों को अवैध विज्ञापन स्थल बना रखा है।


सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध प्रचार पर अब नहीं होगी कोई रियायत
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण लगातार शहर की सुंदरता और सार्वजनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अभियान चला रहा है। इसी क्रम में यह पाया गया कि एक बस स्टैंड पर बिना किसी वैध अनुमति के फेलिक्स हॉस्पिटल का बड़ा विज्ञापन होर्डिंग लगाया गया था। इसे सरकारी नियमों का उल्लंघन मानते हुए प्राधिकरण ने संबंधित संस्था को 10 लाख रुपये का नोटिस जारी कर दिया।
अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों का उपयोग केवल निर्धारित नियमों और अनुमति के अनुसार ही किया जा सकता है। बिना एनओसी या स्वीकृति के लगाए गए किसी भी प्रकार के होर्डिंग, बैनर या पोस्टर को अवैध माना जाएगा और संबंधित संस्था के खिलाफ आर्थिक दंड सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।


एक्टिव सिटीजन टीम ने कार्रवाई का किया स्वागत
एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्य हरेंद्र भाटी ने प्राधिकरण की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय शहर में नियमों के पालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी बस स्टैंड जैसी सार्वजनिक संपत्ति पर भी बिना अनुमति बड़े-बड़े विज्ञापन लगाए जाएंगे तो इससे गलत परंपरा को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि 10 लाख रुपये का नोटिस यह स्पष्ट संकेत देता है कि अब ग्रेटर नोएडा में नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यदि इसी प्रकार की कार्रवाई लगातार जारी रही तो शहर में अवैध विज्ञापन की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।

जर्जर बस स्टैंड पर उठाए सवाल, यात्रियों की सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
हरेंद्र भाटी ने इस मामले का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिस बस स्टैंड पर अस्पताल का विज्ञापन लगाया गया था, उसकी स्थिति स्वयं बेहद जर्जर है। कई स्थानों पर ढांचा क्षतिग्रस्त है और भविष्य में किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बस स्टैंड की मरम्मत और यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए, तब उस पर बड़े-बड़े विज्ञापन लगाकर केवल प्रचार पर ध्यान देना उचित नहीं कहा जा सकता। उनका कहना था कि नागरिकों की सुरक्षा किसी भी प्रकार के व्यावसायिक प्रचार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।


पूरे शहर में अवैध होर्डिंग हटाने की उठी मांग
हरेंद्र भाटी ने कहा कि केवल एक संस्था पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने प्राधिकरण से मांग की कि शहर के प्रमुख चौराहों, डिवाइडरों, बस स्टैंडों, सड़कों, सार्वजनिक भवनों और अन्य सरकारी स्थलों पर लगे सभी अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टरों की जांच कर समान कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बताया कि कई अस्पताल, निजी क्लीनिक, कोचिंग सेंटर, पीजी हॉस्टल, प्रॉपर्टी डीलर और अन्य व्यावसायिक संस्थान बिना अनुमति सरकारी संपत्तियों का उपयोग विज्ञापन के लिए कर रहे हैं। यदि सभी के खिलाफ एक समान कार्रवाई की जाएगी तो भविष्य में कोई भी नियमों का उल्लंघन करने का साहस नहीं करेगा।

GNIDA के सामने रखी गई प्रमुख मांगें
एक्टिव सिटीजन टीम ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे। इनमें पूरे शहर में विशेष “अवैध प्रचार सफाया अभियान” चलाने, बिना एनओसी संचालित कोचिंग सेंटर और पीजी हॉस्टलों के विरुद्ध जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा जर्जर बस स्टैंडों और सार्वजनिक सुविधाओं की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराने की मांग शामिल है। संगठन का कहना है कि यदि सार्वजनिक सुविधाएं बेहतर होंगी और साथ ही अवैध प्रचार पर नियंत्रण रहेगा तो शहर की छवि भी बेहतर बनेगी और नागरिकों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण मिलेगा।


शहर की सुंदरता और कानून व्यवस्था के लिए जरूरी है सख्ती
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध विज्ञापन केवल सौंदर्य बिगाड़ने का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के पालन से भी जुड़ा मामला है। जब बिना अनुमति सरकारी संपत्तियों पर विज्ञापन लगाए जाते हैं तो इससे राजस्व की हानि भी होती है और अन्य संस्थाओं को भी नियम तोड़ने का संदेश जाता है। यदि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस प्रकार के अभियान को नियमित रूप से जारी रखता है तो शहर में स्वच्छता, सौंदर्य और अनुशासन को नई मजबूती मिलेगी।

आगे भी जारी रहेगा अभियान
प्राधिकरण से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में शहर के विभिन्न सेक्टरों और सार्वजनिक स्थलों का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा। जहां भी बिना अनुमति विज्ञापन सामग्री मिलेगी, उसे हटाने के साथ-साथ संबंधित संस्था पर आर्थिक दंड और अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि अब सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

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