
नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के सेक्टर-104, हाजीपुर और सलारपुर क्षेत्र में स्थित महर्षि आश्रम से जुड़ी भूमि पर कथित निर्माण गतिविधियों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विवादित बताई जा रही जमीन पर बहुमंजिला इमारतों और फ्लैट परियोजनाओं का निर्माण लगातार जारी है, जबकि इस भूमि को लेकर पहले भी विभिन्न स्तरों पर सवाल उठते रहे हैं। इन आरोपों के बाद अब मामले की निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग जोर पकड़ने लगी है।
ज़ीरो टॉलरेंस नीति के बीच क्यों उठ रहे सवाल?
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार भू-माफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा करती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है। ऐसे में नोएडा जैसे संवेदनशील और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में यदि किसी भूमि को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े होते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूमि विवादित है या उस पर किसी प्रकार की जांच चल रही है, तो निर्माण गतिविधियों की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की आधिकारिक जांच आवश्यक है।
स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
क्षेत्र के कुछ निवासियों का कहना है कि जिस जमीन को लेकर समय-समय पर विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं, वहां निर्माण कार्य जारी रहने की खबरें आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर फ्लैट खरीदता है और बाद में परियोजना कानूनी विवाद में फंस जाती है, तो सबसे अधिक नुकसान खरीदार को उठाना पड़ता है।
निर्माण गतिविधियों की स्थिति पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि क्षेत्र में निर्माण कार्य लंबे समय से जारी है और इस संबंध में कई बार शिकायतें भी की गई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण पूरी तरह वैध है तो संबंधित एजेंसियों को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और यदि किसी प्रकार की अनियमितता है तो उस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
इसी मुद्दे को लेकर अब प्रशासन से पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि स्पष्ट जानकारी मिलने से अफवाहों और विवादों पर विराम लग सकेगा।
खरीदारों के हितों की सुरक्षा पर जोर
रियल एस्टेट क्षेत्र में सबसे बड़ी चिंता हमेशा खरीदारों की सुरक्षा को लेकर रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार लोग कम कीमत या आकर्षक ऑफर के कारण बिना पर्याप्त जांच के संपत्ति खरीद लेते हैं। बाद में यदि भूमि या निर्माण से जुड़ा विवाद सामने आता है तो आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर भी चर्चा
मामले को लेकर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि किसी क्षेत्र में बड़े स्तर पर निर्माण कार्य हो रहा है, तो उसकी निगरानी और अनुमतियों की प्रक्रिया किस स्तर पर जांची जा रही है। स्थानीय नागरिक चाहते हैं कि संबंधित विभाग समय-समय पर स्थिति स्पष्ट करें और किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर उसकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करें।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर अब कई लोगों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो जाए तो स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है। इससे न केवल वास्तविकता सामने आएगी बल्कि भविष्य में ऐसे विवादों को रोकने में भी मदद मिलेगी।
आम जनता के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी फ्लैट, प्लॉट या संपत्ति में निवेश करने से पहले उसकी वैधता, प्राधिकरण की मंजूरी, भूमि अभिलेख और कानूनी स्थिति की पूरी जांच अवश्य कर लें। इससे भविष्य में होने वाले संभावित विवादों और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।
अब सबकी नजर प्रशासनिक कदमों पर
महर्षि आश्रम से जुड़ी भूमि को लेकर उठे सवालों के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि मामले में किसी प्रकार की जांच चल रही है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक होने से तस्वीर साफ हो सकती है। वहीं यदि सभी अनुमतियां विधिसम्मत हैं, तो उससे भी नागरिकों के बीच फैली आशंकाओं को दूर करने में मदद मिलेगी।



