अथॉरिटीनोएडा

Noida Authority News : ताले में कैद टॉयलेट, ऊपर चमकते विज्ञापन, नोएडा में सुविधा ‘बंद’, कमाई‘ऑन’—जनता पूछ रही, ये कैसा विकास मॉडल? स्मार्ट सिटी के दावों पर उठते सवाल

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नोएडारफ़्तार टूडे  नोएडा शहरजो अपनी आधुनिक सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जाता हैइनदिनों एक अजीब और विडंबनापूर्ण स्थिति का सामना कर रहा है। शहर में बनाए गए पब्लिक टॉयलेट्स पर तालेलटके हुए हैंलेकिन उन्हीं टॉयलेट्स के ऊपर बड़ेबड़े विज्ञापन बोर्ड पूरी रफ्तार से चल रहे हैं। यह स्थिति  केवलआम जनता के लिए असुविधाजनक हैबल्कि प्रशासन की प्राथमिकताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

नोएडा से लेकर ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों पर स्थित ये पब्लिक टॉयलेट्सजो यात्रियों और स्थानीयलोगों के लिए एक जरूरी सुविधा होने चाहिए थेआज बंद पड़े हैं। एक्सप्रेसवे जैसे व्यस्त मार्ग पर यह स्थिति औरभी चिंताजनक बन जाती हैजहां हर दिन हजारों लोग आवागमन करते हैं।

हाईवे पर सबसे बड़ी परेशानीजरूरत के समय सुविधा गायब

नोएडाग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह समस्या किसी मुसीबत से कम नहीं है। लंबेसफर के दौरान टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधा का बंद होना यात्रियों को मजबूर कर रहा है कि वे इधरउधर भटकेंया असुविधाजनक विकल्प अपनाएं। महिलाओंबुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है।शहर में स्मार्ट सिटी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की बात की जाती हैलेकिन जमीन पर ऐसी तस्वीर इन दावों कोकमजोर करती नजर आती है।

विज्ञापन चालूटॉयलेट बंदजनता में गुस्सा

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब टॉयलेट्स बंद हैंतो उनके ऊपर लगे विज्ञापन क्यों चल रहे हैंक्याप्रशासन के लिए आम जनता की सुविधा से ज्यादा जरूरी विज्ञापन से होने वाली कमाई हैस्थानीय लोगों काकहना है कि यह दोहरा रवैया साफ तौर पर दिखाता है कि सिस्टम में कहीं  कहीं प्राथमिकताओं का संतुलनबिगड़ गया है। सुविधा के नाम पर बनाए गए ढांचे केवल कमाई का जरिया बनकर रह गए हैं।

समाजसेवी हरेंद्र भाटी ने उठाई आवाज

इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए वरिष्ठ समाजसेवी Harendra Bhati ने Noida Authority में शिकायत दर्जकराई है। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि अगर टॉयलेट्स को टेंडर प्रक्रिया के चलते बंद रखा गया हैतो कमसे कम उनके ऊपर चल रहे विज्ञापन भी बंद किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि यह स्थिति आम जनता केसाथ अन्याय के समान है।

टेंडर प्रक्रिया बनी बहाना?”

प्राधिकरण की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि टॉयलेट्स को टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही खोला जाएगा।लेकिन यह तर्क जनता के गले नहीं उतर रहा।

लोगों का कहना है कि अगर टेंडर में समय लग रहा हैतो क्या तब तक नागरिकों की बुनियादी जरूरतों कोनजरअंदाज किया जाएगाक्या कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं की जा सकती थी?

अधिकारियों की चुप्पी ने बढ़ाई नाराजगी

इस पूरे मामले पर जब रफ़्तार टूडे ने R. P. Singh से संपर्क करने की कोशिश कीतो उनकी ओर से कोई स्पष्टप्रतिक्रिया नहीं मिली। अधिकारियों की यह चुप्पी लोगों के गुस्से को और बढ़ा रही है। जनता अब जवाब चाहती हैकि आखिर उनकी मूलभूत सुविधाओं को लेकर इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है।

स्मार्ट सिटी के दावों पर उठते सवाल

नोएडा को अक्सर स्मार्ट सिटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण बताया जाता है। लेकिन जब बुनियादीसुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगीतो ऐसे दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजिमी है। यह मामला केवलटॉयलेट्स का नहीं हैबल्कि यह प्रशासनिक सोच और प्राथमिकताओं का भी आईना है।

“ सुविधा बनाम कमाईकौन ज्यादा जरूरी?”

नोएडा में पब्लिक टॉयलेट्स का बंद होना और उनके ऊपर विज्ञापनों का जारी रहना एक बड़ा प्रशासनिकविरोधाभास बनकर सामने आया है।

अब देखना यह होगा कि Noida Authority इस मुद्दे पर कब तक कार्रवाई करता है और कब तक आम जनताको राहत मिलती है। जब तक यह समस्या हल नहीं होतीतब तक लोगों के मन में यही सवाल गूंजता रहेगा

अगर टॉयलेट में ताले ही लगाने थेतो उन्हें बनाया ही क्यों गया?”

Gaurav sharma
Abhishek Sharma

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