Dadri Freedom Fighter News : “स्व. डॉ. रामचन्द्र विकल की 110वीं जयंती पर गुर्जर शहीद भवन में गूंजे सम्मान के स्वर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक और जननायक को दी गई श्रद्धांजलि”, जननायक से जनसरोकार तक — विकल जी की विरासत, श्रद्धांजलि और संकल्प का क्षण

गौतमबुद्धनगर, रफ़्तार टुडे। दादरी के गुर्जर शहीद भवन, मिहिर भोज इंटर कॉलेज परिसर में रविवार को वातावरण श्रद्धा और गौरव से भर उठा, जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पूर्व मंत्री, समाज सुधारक और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष रहे स्वर्गीय डॉ. रामचन्द्र विकल की 110वीं जयंती बड़े आदर और सम्मान के साथ मनाई गई।
गुर्जर विद्या सभा, दादरी (गौतमबुद्धनगर) के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह ने न केवल उनके योगदान को याद किया बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायी सन्देश भी छोड़ा — “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।”
कार्यक्रम का भव्य आयोजन — श्रद्धा, सम्मान और एकता का संगम
जयंती समारोह का आयोजन पूरी गरिमा और अनुशासन के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा सांसद (अनंतनाग, राजौरी-मिओं) श्री अल्ताफ अहमद ने की, जबकि संचालन गुर्जर विद्या सभा के सचिव अधिवक्ता रामशरण नागर ने कुशलतापूर्वक संभाला।
मंच पर जब स्व. डॉ. विकल की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए गए, तो पूरा सभागार मौन श्रद्धांजलि में झुक गया।
इस मौके पर स्व. विकल के पुत्र, पूर्व एम.एल.सी. श्री जगवीर विकल, तथा पौत्र विजयवीर विकल और संजय विकल सहित पूरा परिवार मौजूद रहा।
उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया और कहा कि “हमारे पिता और दादा ने अपना पूरा जीवन जनसेवा और समाज उत्थान को समर्पित किया। उनका जीवन हमें हमेशा प्रेरित करता रहेगा।”
राजनीति, समाज और शिक्षा जगत की विशिष्ट उपस्थिति
कार्यक्रम में क्षेत्र की राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
मुख्य अतिथियों में शामिल रहे एम.एल.सी. एवं पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह भाटी, दादरी विधायक तेजपाल नागर, पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर, जिला पंचायत चेयरमैन अमित चौधरी, जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा, पूर्व विधायक सतवीर गुर्जर, सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी, किसान यूनियन नेता पवन खटाना, पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र भाटी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र डाढ़ा,
कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीपक चौटीवाला, पूर्व सपा जिलाध्यक्ष हरेंद्र (बबल) भाटी, राधाचरण भाटी, ईश्वर भाटी, दिनेश भाटी, श्याम सिंह भाटी, कुलदीप भाटी, बलवीर प्रमुख, भारतीय आदर्श इंटर कॉलेज तिलपता के प्रबंधक बलवीर सिंह आर्य, तथा एडवोकेट देवेंद्र सिंह आर्य सहित क्षेत्र के अनेक प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे।
उनकी उपस्थिति ने समारोह को राजनीतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक बना दिया। मिहिर भोज शिक्षण संस्थाओं के अध्यक्ष, प्रबंधक, प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और छात्र-छात्राओं ने भी पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।

“संघर्ष और सेवा के प्रतीक” — वक्ताओं ने किया डॉ. विकल के जीवन का स्मरण
सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि डॉ. रामचन्द्र विकल केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनसेवा के प्रतीक थे।
उनका जीवन इस बात का उदाहरण था कि दृढ़ संकल्प, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा से समाज में परिवर्तन लाया जा सकता है।
एम.एल.सी. नरेंद्र सिंह भाटी ने कहा “डॉ. विकल ने आज़ादी की लड़ाई में भाग लेकर युवाओं को राष्ट्रहित में काम करने की प्रेरणा दी। राजनीति को उन्होंने सेवा का माध्यम बनाया, सत्ता का साधन नहीं।”
विधायक तेजपाल नागर ने कहा “डॉ. विकल का नाम हमारे इतिहास में उस व्यक्ति के रूप में दर्ज है, जिसने समाज के हर वर्ग की आवाज़ को बुलंद किया।
उन्होंने शिक्षा, किसानों और गरीबों के उत्थान को अपना मिशन बनाया।”
वहीं, पूर्व मंत्री भाजपा हरिचंद्र भाटी ने कहा कि “विकल जी जैसे नेता आज भी हमारे बीच विचारों के रूप में जीवित हैं। उनका जीवन हमें बताता है कि समाज सुधार केवल भाषणों से नहीं, कर्म से होता है।”
जननायक से जनसरोकार तक — विकल जी की विरासत
डॉ. विकल का जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल था।
उन्होंने अपने छात्र जीवन से ही स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया, कई बार जेल गए और आज़ादी के बाद राजनीति में भी नैतिकता और आदर्शों की मिसाल बने रहे।
वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य और कैबिनेट मंत्री रहे।
उनके कार्यकाल में शिक्षा के विस्तार, किसानों के अधिकार, ग्रामीण विकास और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए।
उन्होंने “समानता आधारित समाज” की अवधारणा को आगे बढ़ाया और गुर्जर समाज को शिक्षा और स्वाभिमान की राह दिखाई।
श्रद्धांजलि और संकल्प का क्षण
समारोह के दौरान सभी अतिथियों और प्रतिभागियों ने विकल जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद मौन रखकर उन्हें नमन किया गया।
छात्रों ने कविता और भाषणों के माध्यम से डॉ. विकल के जीवन से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में “देशभक्ति गीत” और “संघर्ष गीत” ने माहौल को भावनात्मक बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में पूरे सभागार ने खड़े होकर राष्ट्रगान गाया और यह संकल्प लिया “हम सब मिलकर विकल जी के दिखाए मार्ग पर चलेंगे और समाज व राष्ट्र के विकास में योगदान देंगे।”

परिवार और आयोजकों की भावनाएं
कार्यक्रम में उपस्थित विकल परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके पूर्वज का जीवन आज भी लोगों को प्रेरित कर रहा है। पूर्व एम.एल.सी. जगवीर विकल ने कहा “हमारा परिवार उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने हमेशा कहा कि ‘राजनीति का उद्देश्य सेवा हो, सत्ता नहीं।’”
गुर्जर विद्या सभा के सचिव रामशरण नागर (एडवोकेट) ने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी संस्थाओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल स्मरण नहीं, बल्कि विचारों के पुनर्जागरण का प्रतीक है।
भविष्य के लिए प्रेरणा का संदेश
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और गणमान्य नागरिकों ने डॉ. विकल के जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया। सभी ने माना कि यदि समाज के हर व्यक्ति में उनके जैसे समर्पण की भावना आ जाए तो भारत वास्तविक रूप से ‘विकसित राष्ट्र’ बन सकता है।



